601.दंष्ट्रा: शत मूर्ति: - सौ दंष्ट्राओं से युक्त मुर्तिवाले ।
602.अमूर्तिमान्:- मूर्तिरहित अर्थात् निराकारस्वरूप ।
603.महानिधि: - सद्गुणों के महान् भण्डार ।
604.महाभाग: - बड़े भाग्यशाली ।
605.महाभर्ग: - महातेजस्वी ।
606.महार्द्धिद: - महान् ऋषि प्रदान करनेवाले ।
607.महाकार: - बड़े आकारवाले ।
608.महायोगी: - महान् योगी ।
609.महातेजा: - बड़े तेजस्वी ।
610.महाद्युति: -अत्यंत शोभावाले ।
611.महासन: - अत्यंत स्थिर आसनवाले ।
612.महानाद: - बड़ी गर्जना करनेवाले ।
613.महामन्त्र: - उच्चकोटि के मंत्रवाले ।
614.महामति: - महान् बुद्धिवाले ।
615.महागम: - महान् गतिवाले ।
616.महोदार: - बड़े उदार ।
617.महादेवात्मक: - महादेवस्वरूप ।
618.विभु: - सर्वव्यापक ।
619.रौद्रकर्मा: - भयामक कर्म करनेवाले ।
620.क्रूरकर्मा: - कठोर कर्म करनेवाले ।
621.रत्नाभ: - रत्न के समान नाभिवाले ।
622.कृतागम: - शास्त्रकी रचना करनेवाले ।
623.अम्भोधि लङ्घन: - समुद्र लाँघनेवाले ।
624.सिंह: - सिंहस्वरूप ।
625.सत्यधर्म प्रमोदन: - सत्यधर्म का पालन करनेमें प्रसन्न ।
626.जितामित्रो: - शत्रुओं को जीतनेवाले ।
627.जय: - जयस्वरूप ।
628.सोम: - सोमस्वरूप ।
629.विजयी: - पराक्रमी ।
630.वायुनन्दन: - पवनदेवता को आनंदित करनेवाले ।
631.जीवदाता: - प्राणदान करनेवाले ।
632.सहस्रांशु: - सूर्यस्वरूप ।
633.मुकुन्द: - मुक्तिप्रदान करनेवाले ।
634.भूरिदक्षिण: - विपुल दक्षिणा प्रदान करनेवाले ।
635.सिद्धार्थ: - सदासिद्ध प्रयोगवाले ।
636.सिद्धिद: - सिद्धि देनेवाले ।
637.सिद्ध सङ्कल्प: - सिद्ध संकल्पवाले ।
638.सिद्धि हेतुक: - सिद्धियों के कारण ।
639.सप्तपातालचरण: - सप्तपाताल में संचरण करनेवाले ।
640.सप्तर्षिगणवन्दित: - सप्तऋषियों द्वारा वंदित ।
641.सप्ताब्धिलङ्घन: - सातों समुद्रों को लाँघनेवाले ।
642.वीर: - संदेश पहुँचानेवालों में वीर ।
643.सप्तद्वीपोरुमण्डल: - सप्तद्वीप के विशाल मण्डल में विचरण करनेवाले ।
644.सप्ताङ्गराज्यसुखद: - सप्ताङ्ग़युक्त राज्य के लिये सुखद ।
645.सप्तमातृनिषेवित: - सात माताओं द्वारा सेवित ।
646.सप्तस्वर्लोकमुकुट: - सात स्वर्गलोकों के मुकुटमणि ।
647.सप्तहोता: - सामवेद के सात मंत्रों से हवन करनेवाले ।
648.स्वाराश्रय: - स्वरों का आश्रय लेनेवाले अर्थात् संगीत- शास्त्रों में प्रवीण ।
649.सप्तच्छन्दोनिधि: - सात वैदिक छंदों के आश्रय ।
650.सप्तच्छन्द: - सात छन्दस्वरूप ।
651.सप्तजनाश्रय: - सप्तजनों के आश्रयस्वरूप ।
652.सप्तसामोपगीत: - जिनका सामवेद की सात स्वरोंद्वारा गान किया जाता है ।
653.सप्तपाताल संश्रय: - सप्तपाताल के आश्रय ।
654.मेधाद: - मेधा को प्रदान करनेवाले ।
655.कीर्तिद: - यश देनेवाले ।
656.शोकहारी: - शोक हरण करनेवाले ।
657.दौर्भाग्यनाशन: - दुर्भाग्य का नाश करनेवाले ।

658.सर्वरक्षाकर: -चारों ओर से रक्षा करनेवाले ।
659.गर्भदोषहा: - गर्भ-दोष को दूर करनेवाले ।
660.पुत्रपौत्रद: - पुत्र और पौत्र प्रदान करनेवाले ।
661.प्रतिवादिमुखस्तम्भ: - प्रतिवादी के मुख को बंद करनेवाले अर्थात् श्रेष्ठ वक्ता ।
662.रुष्टचित्तप्रसादत: - रूष्टचित्तवालों को प्रसन्न करनेवाले ।
663.पराभिचारशमन: - शत्रु के मारण- मोहन आदि अभिचारों को शमन करनेवाले ।
664.दुःखहा: - दु:खों का नाश करनेवाले ।
665.बन्धमोक्षद:- बंधनसे मुक्त करनेवाले ।
666.नवद्वारापुराधार : - नवद्वारपुर (शरीर ) के आधार ।
667.नवद्वारनिकेतन: - नवद्वारवाले शरीररूपी घर में रहनेवाले आत्म-स्वरूप ।
668.नरनारायण स्तुत्य: - नर और नारायण के द्वारा स्तुत्य ।
669.नवनाथ महेश्वर: - नवनाथों के महेश्वर ।
670.मेखली: - मेखला धारण करनेवाले ।
671.कवची: - कवच धारण करनेवाले ।
672.खंगी: - खड्ग धारण करनेवाले ।
673.भ्राजिष्णु: - देदीप्यमान ।
674.जिष्णुसारथि: - अर्जुन के सारथि अर्थात् ध्वजा में निवास करनेवाले ।
675.बहुयोजनविस्तीर्णपुच्छ: - अनेक योजन लम्बी पूँछवाले ।
676.पुच्छहतासुर: - पूँछसे राक्षसों को मारनेवाले ।
677.दुष्टग्रहनिहन्ता: - दुष्टग्रहों के नाशक ।
678.पिशाचग्रहघातक: - पिशाचग्रह के हन्ता ।
679.बालग्रह विनाशी: - बालग्रहों का विनाश करनेवाले ।
680.धर्मनेता: - धर्म के नेता ।
681.कृपाकार: - कृपा करनेवाले ।
682.उग्रकृत्य: - उग्र कृत्यकर्ता ।
683.उग्रवेग: - भयंकर वेगवान्।
684.उग्रनेत्र: - उग्र नेत्रवाले ।
685.शतक्रतु: - सौ यज्ञ करनेवाले इंद्रस्वरूप ।
686.शतमन्युनुत: - इन्द्रद्वारा स्तुत ।
687.स्तुत्य: - स्तुति करने योग्य ।
688.स्तुति: - स्तुतिस्वरूप ।
689.स्तोता: - स्तुति करनेवाले ।
690.महाबल: - अत्यंत बलशाली।
691.समग्रगुणशाली: - सारे- गुणों से युक्त ।
692.व्यग्र: - सदा उद्यत ।
693.रक्षोविनाशक: - असुरों का विनाश करनेवाले ।
694.रक्षोऽग्निदाह: - राक्षसों को अग्नि में जलादेनेवाले ।
695.ब्रह्मेश: - ब्रह्मा के ऊपर शासन करनेवाले ।
696.श्रीधर: - ऐश्वर्य धारण करनेवाले ।
697.भक्तवत्सल: - भक्तों पर कृपा करनेवाले ।
698.मेघनाद: - मेघ के समान गर्जनेवाले ।
699.मेघरूप: - मेघ के समान रूपवाले ।
700.मेघवृष्टिनिवारक: - मेघ की वृष्टि को रोकनेवाले ।

हनुमान साठिका (HANUMAN SATHIKA)
हनुमान साठिका का प्रतिदिन पाठ करने से मनुष्य को सारी जिंदगी किसी भी संकट से सामना नहीं करना पड़ता । उसकी सभी कठिनाईयाँ एवं बाधाएँ श्री हनुमान जी आने के पहले हीं दूर कर देते हैं। हर प्रकार के रोग दूर हो जाती हैं तथा कोई भी शत्रु उस मनुष्य के सामने नहीं टिक पाता । Read More

हनुमान बाहुक (HANUMAN BAHUK)
एक बार गोस्वामी तुलसीदासजी बहुत बीमार हो गये । भुजाओं में वात-व्याधि की गहरी पीड़ा और फोड़े-फुंसियों के कारण सारा उनका शरीर वेदना का स्थान-सा बन गया था। उन्होंने औषधि, यन्त्र, मन्त्र, त्रोटक आदि अनेक उपाय किये, किन्तु यह रोग घटने के बदले दिनों दिन बढ़ता ही जाता था। Read More
बजरंग बाण पाठ महात्मय
श्री बजरंग बाण- बजरंग बाण तुलसीदास द्वारा अवधी भाषा में रचित हनुमान जी का पाठ है । बजरंग बाण यानि की भगवान महावीर हनुमान रूपी बाण जिसके प्रयोग से हमारी सभी तरह की विपदाओं, दु:ख, रोग, शत्रु का नाश हो जाता है।Read More
श्री हनुमत्सहस्त्रनाम स्तोत्रम (HANUMAN SAHASRANAMAM STOTRAM)
जो भी मनुष्य सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करता है उसके समस्त दु:ख नष्ट हो जाते हैं तथा उसकी ऋद्धि –सिद्धि चिरकाल तक स्थिर रहती है। प्रतिदिन डेढ़ मास तक इस हनुमत्सहस्त्रनाम स्तोत्र का तीनों समय पाठ करने से सभी उच्च पदवी के लोग साधक के अधीन हो जाते हैं । Read More